सामान्यतः जन्म कुंडली के बाकी सात ग्रह राहु और केतु के मध्य स्थित हो जाते हैं तो उस स्थिति को "कालसर्पयोग" कहते हैं।
हिंदू कैलेंडर के अनुसार पितृपक्ष गणेश उत्सव के तुरंत बाद शुरू होता है और सर्वपितृ अमावस्या के दिन समाप्त होता है।
मंगल भात पूजा, भगवान मंगलनाथ की पूजा के लिए की जाने वाली एक पूजा है. यह पूजा, मंगल दोष को भगवान मंगलनाथ .....
यदि लड़के अथवा लड़की की कुंडली में सप्तम भाव अथवा बारहवां भाव क्रूर ग्रहों से पीडि़त ...
रुद्राभिषेक में 108 पवित्र द्रव्यों से शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है। हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, रुद्राभिषेक
महामृत्युंजय मंत्र, भगवान शिव को समर्पित एक प्रभावशाली मंत्र है. इसे त्रयम्बक मंत्र भी कहा....
चंद्र-राहु या सूर्य-राहु की युति को ग्रहण योग कहते हैं। यदि बुध की युति राहु के साथ है तब यह जड़त्व योग..
स्वर्णाकर्षण भैरव काल भैरव का सात्त्विक रूप हैं, जिनकी पूजा धन प्राप्ति के लिए की जाती है,...
दुर्गा जी को प्रसन्न करने के लिए जिस यज्ञ विधि को पूर्ण किया जाता है, उसे शतचंडी यज्ञ बोला जाता.
ऋण मुक्ति पूजा एक हिंदू धार्मिक प्रथा है जिसमें ऋण बंधन से मुक्ति प्राप्त करने के लिए पूजा की....
माँ बगलामुखी का हवन, जिसे बगलामुखी यज्ञ भी कहा जाता है, एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है जो शत्रुओं पर विजय, बाधाओं से मुक्ति और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
सनातन धर्म में प्राण प्रतिष्ठा का बहुत ज्यादा महत्व है. मूर्ति स्थापना के समय प्राण प्रतिष्ठा जरूर किया...